Skip to main content
निरोप 

जन्माला आल्यावर तिला परक्याचा धन आपणच म्हणत असतो. 
तिने काही मागीतले तर नवऱ्या कडून माग अस आपणच सांगत असतो. 
मग का तिला निरोप देताना आपण रडत असतो. 

तिला प्रय्तेक गोष्टीत आपणच कमी लेखत असतो. 
सतत हे घर तुझ नाही अस आपणच सांगत असतो. 
मग का तिला निरोप देताना आपण रडत असतो 

तिला स्वतःच्या घरातून आपणच पाठवत असतो. 
तिला दुसऱ्याच नाव लावायला आपणच सांगत असतो. 
मग का तिला आपण निरोप देताना आपण रडत असतो. 

दुसऱ्यला आपल म्हणयला आपणच सांगत असतो. 
आपल्याला विसरली म्हणून रागावणारे आपणच असतो. 
मग का तिला आपण नितोप देताना आपण रडत असतो. 

-Pranav Vispute PV



Popular posts from this blog

दिल ने पुकारा तुझे प्यार से | पर तुने उसे अनसुना किया | मै आया था तुझसे बात करने | पर तुने अपना नाम नही बताया | अब क्या कहू मै ईस दिल से तुही बता | क्यू की मेरा दिल मेरे पास न रहा |                         :-PRANAV VISPUTE PV 
दोस्ती ने जोडाभी है | दोस्ती ने टूटनेसे बचाया भी है | सच्चा यार वही है | जिसने जिना सीकाया भी है |                          :-PRANAV VISPUTE PV 
तु जान है मेरी | तु आवाज है मेरी | तु दिल है मेरा | और तेरी दोस्ती धडकन है मेरी |                          :- Pranav Vispute PV