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Showing posts from December, 2018
गुरु जिसे कहे दुनिया | हो ग्यान का समंदर है | जिसमे बहते जाना हमे है | क्यू की मंजिल हमारी समंदर मे है |                                       :-Pranav Vispute PV
जैसे कोयले से हिरा निकलता है | जैसे मिट्टी से मटका बनता है | जैसे सिप से मोती निकलता है | वैसे गुरु से समाज बनता है |                                  :- Pranav Vispute PV